NewsBook Digital Desk | 24 मार्च 2026
खाड़ी में जंग और भारत की परेशानी
खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव और ईरान-इजरायल युद्ध ने वैश्विक तेल बाज़ार में हड़कंप मचा दिया है। भारत, जो अपनी ऊर्जा ज़रूरतों के लिए बड़े पैमाने पर इस क्षेत्र पर निर्भर है, अब एक बड़े संकट की दहलीज़ पर खड़ा है।
इजरायल और हमास से हुई संघर्ष की शुरुआत
7 अक्टूबर 2023 की सुबह, हमास ने इजरायल के दक्षिणी जिले में नोवा म्यूजिक फेस्टिवल पर एक के बाद एक लगातार 5000 मिसाइल हमले किए। इजरायल ने युद्ध घोषित कर हमास और गाजा पर आक्रमण शुरू किया, जिसमें बाद में लेबनान समर्थित हिजबुल्ला भी सम्मिलित हो गया।
ईरान पर संयुक्त हमला: 28 फरवरी 2026 का घटनाक्रम
28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इज़राइल ने ईरान के रणनीतिक ठिकानों पर हवाई हमले किए। इन हमलों में मिसाइल, ड्रोन और B2 बॉम्बर जैसे साधन प्रयोग हुए। जवाब में ईरान ने बहरीन, कुवैत, जॉर्डन, क़तर, सऊदी अरब और दुबई में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों पर एक साथ ड्रोन और मिसाइल हमले किए।
यह जंग अब सीधे भारत की रसोई, पेट्रोल पंप और फैक्ट्रियों तक पहुँच रही है।
होर्मुज़ स्ट्रेट: पेट्रोलियम का लाइफलाइन
- स्थिति: होर्मुज़ स्ट्रेट ईरान और ओमान के मध्य 33 किलोमीटर चौड़ा जलक्षेत्र है।
- ग्लोबल इम्पैक्ट: दुनिया का 20% कच्चा तेल (करीब 2 करोड़ बैरल प्रतिदिन) यहीं से गुज़रता है।
- भारत का संकट: होर्मुज़ से गुज़रने वाले तेल में भारत की हिस्सेदारी 14.7% है। चीन के बाद हम इसके सबसे बड़े खरीदार हैं।
- बढ़ती लागत: हमलों के कारण जहाजों का बीमा 3 गुना महंगा हुआ।
15 मार्च तक ईरान ने अल जजीरा के अनुसार 17 व्यापारिक जहाज़ों पर हमले किए और टैंकर ट्रैफिक 70% तक गिर गई। 150 से ज़्यादा जहाज़ होर्मुज़ के बाहर लंगर डाले खड़े हैं।
भारत पर सीधी मार: तेल, गैस और रुपया
- ऊर्जा संकट: कतर से आने वाली 60% प्राकृतिक गैस की आपूर्ति खतरे में है।
- आर्थिक दबाव: MUFG रिसर्च के अनुसार रुपया ₹95 के पार जा सकता है (23 मार्च को ₹94 पहुंचा)।
- महंगाई: उर्वरक उत्पादन प्रभावित होने से खाद्य वस्तुओं की कीमतें बढ़ने के आसार हैं।
- शेयर बाजार: Sensex/Nifty में भारी गिरावट, निवेशकों के अरबों रुपये डूबने का खतरा।
भारत ने क्या किया और क्या करना चाहिए?
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार भारत ने अपनी 70% कच्चे तेल की आपूर्ति होर्मुज़ के बाहर से सुनिश्चित कर ली है। अमेरिकी ट्रेज़री ने 6 मार्च 2026 को भारत को 30 दिन की आपातकालीन छूट दी, जिससे रूसी तेल खरीदने की अनुमति मिली।
- रणनीतिक तेल भंडार बढ़ाना।
- घरेलू पेट्रोलियम उत्पादन का स्तर बढ़ाना।
- सौर और नवीकरणीय ऊर्जा में तेज़ी लाना।
- वैकल्पिक समुद्री मार्ग तैयार करना।
अंतर्राष्ट्रीय संकट समूह के ईरान विशेषज्ञ अली वाएज़ के अनुसार होर्मुज़ बंद होने से रातों रात दुनिया का पाँचवाँ हिस्सा तेल बाज़ार से गायब हो जाएगा। भारत के पास अभी भी वक्त है — लेकिन यह वक्त सिर्फ संकट से उबरने का नहीं, बल्कि ऊर्जा आत्मनिर्भरता की नींव रखने का है।
AI का इस्तेमाल: यह रिपोर्ट तैयार करने में ChatGPT, Google Gemini और Grok जैसे AI टूल्स की मदद ली गई।
स्रोत: Wikipedia | EIA | Al Jazeera | MUFG Research | DD News | Human Rights Watch | USNI News